Saturday, September 3, 2016

पब्लिश्ड बुक्स लिस्ट

गोल्डन रुल ग़ज़ल 1

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घर से बेघर

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गज घुंघट की ओट म्हं







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चाहे जिसने भी कही है बात लेकिन सच सही है

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एक भूली सी कहानी ढूंढते हो- चाँद मंगल पे paani


फेस बुक

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जिन्दगी है या सजा है


, तुम बोलो झूठ अदा हो जाता है २ शेर


भीतर आना मना है


बूँद बूँद कर बरसा पानी

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बीत गई सो बात गई



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चल पड़ा मौसम ग़ज़ल

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आईने ने यूँ निकाली दुश्मनी


Friday, May 9, 2014

Swami Vivekanad was pupil of Sri Ramkrishna Parmhans , Parmhans was pupil of Sri Totapuri.

Swami Vivekanad was pupil of Sri Ramkrishna Parmhans , Parmhans was pupil of Sri Totapuri. Sri Tota puri belonged to village Ladhana of Dist Kaithal of Haryana .story goes like this that Totapuri went from Haryana to Bengal to initiate RK to sanyas.and told him that he has come specially for this purpose. RK said when Ma Kali comes in person to him during sadhna why should I take Diksha from You. Totapuri told him that you ask Ma because Ma has sent me. This whole episode appeared in a Ph D thesis carried out by a 70 years Monk Sh vanmalidata under Guidance of Mahrishi Dayand University Rohtakमेरा एक और ब्लॉग http://katha-kavita.blogspot.com/

Tuesday, December 3, 2013

मानता हूं है बहुत काली मेरी लैला मगर- gazal by shyamskha shyam

मेरे गम का क्या सबब है क्या तुम्हे मालूम है
दर्द सहना भी अदब है क्या तुम्हे मालूम है

मानता हूं है बहुत काली मेरी लैला मगर
सादगी उसकी गज़ब है क्या तुम्हे मालूम है

इश्क है गहरा समन्दर पार जाता है वही
डूबने का जिसको ढ़ब है क्या तुम्हे मालूम है

जानता हूं सुध कयामत के दिवस लोगे  मेरी
पर जरूरत आज अब है क्या तुम्हें मालूम है।

सायबानो में रकीबों के तेरा हो जिक्र जब
जान जाती मेरी तब है क्या तुम्हे मालूम है

तुम जमाने से छुपा लोगे सखा अपने गुनाह
देखता रहता है वो सब है क्या तुम्हे मालूम है

मीरा राधा गोपियां उद्धव सुदामा गर बनो
श्याम मिलता यार तब है क्या मालूम है
 

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Wednesday, March 27, 2013

देखूं जो तुमको भांग पीके अबीर गुलाल लगें सब फ़ीके



देखूं जो तुमको भांग  पीके
अबीर गुलाल लगें सब फ़ीके












मोतियाबिन्दी नयनो  में काजल
्नित करता मुझको है पागल










अदन्त मुंह और हंसी तुम्हारी
इसमे दिखता ब्रह्माण्ड है प्यारी










तेरा मेरी प्यार है जारी
 जलती हमसे दुनिया सारी




क्या समझें ये दुध-मुहें बच्चे
कैसे होते प्रेमी सच्चे







दिखे न आंख को कान सुने ना
हाथ उठे ना पांव चले ना





पर मन तुझ तक दौड़ा जाए
ईलू-इलू का राग सुनाए


हंसते क्यों हैं पोता-पोती
क्या बुढापे में न मुहब्ब्त होती



सुनलो तुम भी मेरे प्यारे
कहते थे इक चच्चा हमारे



कौन कहता है बुढापे में मुहब्ब्त का सिलसिला नहीं होता
आम भी तब तक मीठा नहीं होता जब तक पिलपिला नहीं होता






होली में तो गजल-हज्ल सब चलती है
                                                      
जलने दो गर दुनिया जलती है
ही तो होली की मस्ती है 
 

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Monday, February 25, 2013

यही तेरी कहानी है यही मेरी कहानी है-gazal by Dr shyamskha shyam



my 1st day at Houstan texas-will be here till 18th march
कभी पत्थर कभी कांटे कभी ये रातरानी है

यही तो जिन्दगानी है,यही तो जिन्दगानी है


जमीं जबसे बनी यारो तभी से है वजूद इसका

नये अन्दाज दिखलाती मुहब्बत की कहानी है


खुशी से रह रहे थे हम मिले तुझसे नहीं जब तक

तुझे मिलकर हुआ ये दिल गमों की राजधानी है 


मुझे लूटा है अपनो ने तुझे भी खा गये अपने

यही तेरी कहानी है यही मेरी कहानी है


रही है दूर ये दिल्ली,रहेगी दूर ये दिल्ली

रखैली थी रखैली है ये दिल्ली राजधानी है


रहे डरते `सखा' ताउम्र कुछ करने से पहले हम

हुये है मस्त कितने जब से छोड़ी सावधानी है

mfaelun,mfaelun,mfaelun,mfaelun





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Monday, February 4, 2013

घर से बाहर हूं घर मेरे भीतर है- gazal Dr shyam skha shyam

घर  से   बाहर  हूं  घर   मेरे   भीतर है
बात यही मुझको देती दुख अक्सर है

औढ़  आकाश  सदा सोये हम बंजारे
रात हुए धरती बन जाती बिस्तर है


बादल बिजुरी जब भी  हैं करते मस्ती
घबराता रहता बेचारा छप्पर है

रात मजे में सोती रहती है शब भर
दिन बेचारा खटता रहता दिन भर है

नेह उडेला है सदियों से नदियों ने
फिर भी क्यों खारा का खारा सागर है

खुशियां तो कब की भाग गईं पीठ दिखा
गम बैठा दिल में बनकर दिलबर है




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