Tuesday, August 30, 2011

तू आर हो जा या पार हो जा -gazal by shyamskha shyam


30

तू आर हो जा या पार हो जा
पर इक तरफ मेरे यार हो जा

या तो सिमट कर रह मेरे दिल में
या फैल इतना, संसार हो जा   

जो जुल्म बढ़ जाये हद से ज्यादा
तजकर अहिंसा हथियार हो जा

गुल था शरारत करने लगा जब
तितली ने कोसा जा खार हो जा

सूखा है मौसम, सूखी हूँ मै भी
अब प्यार की तू रसधार हो जा

गर थी तुझे धन की कामना तो
किसने कहा था फनकार हो जा

राधा भी तेरी, मीरा भी तेरी
तू ‘श्याम’ मेरा इस बार हो जा



 मुस्तफ़इलुन,फा ,मु्स्तफ़इलुन फा



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Monday, August 22, 2011

मीरा -श्याम -जन्म अष्टमी पर विशेष


राह मिल्यो वो छैल छबीलो


जब तैं प्रीत श्याम सौं कीनी
तब तैं मीरां भई बांवरी,प्रेम रंग रस भीनी 
तन इकतारा,मन मृदंग पै,ध्यान ताल धर दीनी
 
अघ औगुण सब भये पराये भांग श्याम की पीनी
 
राह मिल्यो वो छैल-छ्बीलो,पकड़ कलाई लीनी
 
मोंसो कहत री मस्त गुजरिया तू तो कला प्रवीनी

लगन लगी नन्दलाल तौं सांची हम कह दीनी 
जनम-जनम की पाप चुनरिया,नाम सुमर धोय लीनी
 
सिमरत श्याम नाम थी सोई,जगी तैं नई नवीनी
 
जब तैं प्रीत श्याम तैं कीनी



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Monday, August 15, 2011

वो सादगी, वो बाँकपन गया कहाँ तेरा बता- gazal shyam skha

29
नकाब ओढ़कर महज नकाब जिंदगी हुई
यूँ आपसे मिली कि बस खराब जिंदगी हुई

मुझे निकाल क्या दिया जनाब ने खयाल से
पड़ी हो जैसे शैल्फ पर किताब जिंदगी हुई

लगा यूँ सालने कभी अँधेरे का जो डर उसे
समूची जल उठी कि आफताब जिंदगी हुई

गुनाह में थी साथ वो तेरे सखी रही सदा
नकार तूने क्या दिया सवाब जिंदगी हुई

वो सादगी, वो बाँकपन गया कहाँ तेरा बता
जो कल तलक थी आम, क्यों नवाब जिंदगी हुई

हकीकतों से क्या हुई मेरी थी दुश्मनी भला
खुदी को भूलकर फ़कत थी ख्वाब जिंदगी हुई

तेरे खयाल में रही छुई-मुई वो गुम सदा
भुला दिया यूँ तुमने तो अजाब जिन्दगी हुई

फुहार क्या मिली तुम्हारे नेह की भला हमें
रही न खार दोस्तो गुलाब जिन्दगी हुई

खुमारी आपकी चढ़ी कहूँ भला क्या ‘श्याम’ जी
बचाई मैंने खूब पर शराब जिंदगी हुई

बही में वक्त की लिखा गया क्या नाम ‘श्याम’ का
गजल रही न गीत ही कि ख्वाब जिंदगी हुई



मफ़ाइलुन ,मफ़ाइलुन ,मफ़ाइलुन ,मफ़ाइलुन [४.२.१९९३]


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Tuesday, August 9, 2011

futkar she`r---देखकर तेरा बदन फ़नकार आइने हुये

laxmi menon model said she has done nude photograph for calenders, so that she may enjoy looking them when she is 60 years ओल्ड

 देख मुझको थे कभी फ़नकार आइने हुये


उम्र  मेरी  क्या ढ़ली मक्कार आइने हुये



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Wednesday, July 27, 2011

रखेंगे बन्द ,लोग अपनी जुबान कब तक--gazal

28
रहेंगे हम, घर में अपने ही मेहमान कब तक
रखेंगे यूं  बन्द ,लोग अपनी जुबान कब तक

फ़रेब  छल,झूठ आप रखिये सँभाल साहिब
भरोसे सच के भला चलेगी दुकान कब तक

चलीं हैं कैसी ये नफ़रतों की हवायें यारो
बचे रहेंगे ये प्यार के यूं मचान कब तक

हैं कर्ज सारे जहान का लेके बैठे हाकिम
चुकाएगा होरी,यार इनका लगान कब तक

इमारतों पर इमारतें तो बनायी तूने
करेगा तामीर प्यार का तू मकान कब तक

रही है आ विश्व-भ्रर से कितनी यहां पे पूंजी
मगर रहेंगे लुटे-पिटे हम किसान कब तक

रहेगा इन्साफ कब तलक ऐसे पंगु बन कर
गवाह बदलेंगे आखिर अपना बयान कब तक

दुकान खोले कफ़न की बैठा है ‘श्याम’ तो अब
भला रखेगा ‘वो’ बन्द अपने मसान कब तक



मफ़ाइलुन,फ़ाइलातु मुसतफ़इलुन फ़ऊलुन [बहरे मुन्सरह का एक भेद ]








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Friday, July 22, 2011

मत बोल आधा सच---gazal shyam skha shyam










27

खुद से तू मत बोल आधा सच
झूठ में मत तू घोल आधा सच

मच जायेगा शोर जगत में
ऐसे मत तू खोल आधा सच

बनिया है न तू है सौदागर
फिर भी रहा क्यों तोल आधा सच

झूठों का दबदबा न छाये
यूँ तो न कर तू गोल आधा सच

बोल युधिष्ठिर भान्ति न कुछ तू
देगा खोल तू पोल  आधा सच

माना है इतिहास अधूरा
क्या है नहीं भूगोल आधा सच

फ़ेलु.फ़ऊल फ़ऊल फ़ऊलुन, [,०६,05








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Friday, July 15, 2011

फ़ुटकर शे‘र ---बेवफ़ा मैं नहीं- श्याम सखा श्याम



 सच कहूं   दोस्तों      बेवफ़ा मैं नहीं
 सच कहूं, सच कभी बोलता मैं नहीं




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Tuesday, July 5, 2011

दिल में ग़म की किताब रखता है --- gazal shyam skha shyam


26
                                                            लिख के सबका हिसाब रखता है
                                                           दिल में ग़म की किताब रखता है 


                                                            क्या बिगाड़ेगा कोई उसका, वो
                                                            खुद को खानाखराब रखता है

                                                            आग आँखों में और मुट्ठी में
                                                         वो सदा इन्किलाब रखता है

                                                      जो है देखें जमाने की सीरत
                                                     खुद को वो कामयाब रखता है

                                                  उसकी नाजुक अदा के क्या कहने
                                                    मुटठी में माहताब रखता है

                                                   बाट खुशियों की जोहता है तू
                                               दिल में क्यों फिर अजाब रखता है

                                                 आइने से न कर लड़ाई ,कि वो
                                             कब किसी का हिजाब रखता है

                                              ‘श्याम’ से गुफ़्तगू करोगे क्या
                                              वो सभी का जवाब रखता है

                                            श्याम’ चितचोर है नचनिया  है
                                              कैसे-कैसे खिताब रखता है




 फाइलातुन ,मफाइलुन ,फेलुन



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Friday, July 1, 2011

ग़म हुआ जवान था----- gazal shyam skha shyam


25 
               गूंगे का बयान था
              तीर था कमान था

                प्यार का उफान था
               ग़म हुआ जवान था

               छोड़ते ही घर, लगा
              अपना तो जहान था

              पीड़ की वो हाट थी
              प्यार का मचान था

              बाप था ढलान पर
             सुत हुआ जवान था

            घर बिका किसान का
            शेष पर लगान था

फ़ाइलुन,मफ़ाइलुन   ..२००६


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Monday, June 27, 2011

छंद मन व तन में सकारात्मक संवाद करवाता है---श्याम सखा श्याम



                                            छंद  आनन्द का प्रतीक होता है।.
                                                           छंद का उल्लेख सबसे पहले वेदों में हुआ है। छंद से जुड़कर साधारण बातें  में गति व यति का आर्विभाव होने लगता है।
                      गति व यति से रस उत्पन्न होता है। यह रस ही आनन्द कहलाता है।
               संसार भर की सभी भाषाएं छंद में ही जीवित रह पाईं हैं- जैसे इजराइल के देश बनने से पहले हिब्रु भाषा ,दुनिया भर में बिखरे यहुदियों की प्राथना भजनो में ही बची थी। 
          आज देवभाषा संस्कृत भी उसी ओर जा रही है। कुछ दिनो बाद यह केवल वेद उपनिषदों, पौराणिक श्लोकों में ही बच पाएगी

                                         छंद, भाषा, संस्कृति, कविता या सभ्यता जितना ही पुराना है।

                                          छंद है क्या?
              आइये!  देखें \

     भारतीय  समय गिनने की प्रकिर्या को समझने का प्रयास करने से छंद को समझने में सहायक होगा।

   दस दीर्घमात्रिक शब्द बोलने पर जितना समय लगता है==== १ सासं या प्राण कहलाता है

                                  ६ प्राण=== १ पल

                                 ६० पल === १ घड़ी

                                ६० घड़ी==== १ दिन

                               २.५ घड़ी====== १ घंटा  === ९०० सांस या प्राण

                                 १ मिनट== १५ सांस

                    छ्ंद के उच्चारण से सांस की गति एक तान हो जाती है। 

                   मन स्थिर हो जाता है एवम्‌ ध्यान की क्षमता पा जाता है।

                    ध्यान से चेतना में नवांतर हो हो जाता है और फ़िर मस्तिष्क का अणु-अणु जीवंत हो उठता है।

                                             छंद  जब अन्तर्मन से उठता है तो जीवन अर्थवान होने लगता है।

                                       इस प्रकार छंद की पुनरावृति [ जाप ]नये अर्थ का वाहक बनकर प्रगट होती है।


                                    छंद की पुनरावृति से मानव की नकारात्मकता, सकारात्मकता में बदलने लगती है।

                                      इस अवस्था को ही समाधि कहा जाता है। 
    
                                  शरीर में प्राण व मन ही निर्णय करने वाले होते हैं।

                                जब मन गलत निर्णय लेता है तो प्राण [ सांस ] की गति बढ जाती है,

                               गुस्से व झूठ बोलते वक्त- [यही तथ्य लाई-डिक्टेटिंग मशीन का आधार है] 

                                 छंद के उपयोग से ही शरीर में सकारात्मक उर्जा उत्पन्न होती है- जो मन को नवान्तर या समाधि की अवस्था में ले जाता है

                                   लिपिबद्ध छंद ही मन्त्र कहलाता है। मन्त्र का शाब्दिक अर्थ है-- मन की बात

                                         छंद मन व तन में सकारात्मक संवाद करवाता है

                                            छंद [ मन्त्र ] के सस्वर उच्चारण से वातावरण में ऊर्जा उत्पन्न होकर वायुमंडल में फ़ैलती है।, जिससे तरंगे उत्पन्न होकर आसपास को अपने प्रभाव क्षेत्र में ले लेती हैं। ऐसा अनुभव सभी को, किसी संगीत के महफ़िल या भजन संध्या पर अकसर हुआ होगा।

                         छंदो के जाप से उत्पन्न ध्वनि ऊर्जा व तरंगे साफ़ अनुभव की जा सकती हैं। इस अनुभव की सतत अनूभूति ही समाधि की अवस्था कहलाती है।

     य़ही नही  इस अवस्था प्राप्त व्यक्ति के समीप भी इस ऊर्जा को अनुभव किया जा सकता है।

                 इसी वजह से संसार के सभी धर्मों में जाप का प्रचलन हुआ है








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Friday, June 24, 2011

जिन्दगी-भर उदास रहना था ?-- gazal shyam skha shyam


24


जिन्दगी-भर उदास रहना था
फिर तो मेरे ही पास रहना  था

थे यहाँ तो महज अँधेरे ही
तुझको लेकर उजास रहना था


आमों मे वो तो हो गये हैं बबूल
उनको तो बन के खास रहना था




सब थे नंगे हमाम में फ़िर भी
तुमको तो बालिबास रहना था


देख कर तेरे हुस्न का जल्वा
किसको होशो-हवास रहना था

फ़ाइलातुन,मफ़ाइलुन,फ़ेलुन




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Thursday, June 16, 2011

गुल गुलामी करे है मौसम की-----gazal shyam skha shyam

   जब कि हर दिल में प्यार रहता है
   दिल क्यों फिर बेकरार रहता है


  गुल गुलामी करे है मौसम की
 मस्त हर वक्त खार रहता है


 भूल जाते हैं दोस्त को हम लोग
 दिल पे दुश्मन सवार रहता है


वक्त तो लौटकर नहीं आता
शेष बस    इन्तजार रहता है



 ‘श्याम’ अहसान चीज है जालिम
   जिन्दगी भर उधार रहता है


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Friday, June 10, 2011

जिन्दगी-भर उदास रहना था ?-- gazal shyam skha shyam


24 .

जिन्दगी-भर उदास रहना था
फिर तो मेरे ही पास रहना  था

थे यहाँ तो महज अँधेरे ही
तुझको लेकर उजास रहना था

आमों मे वो तो हो गये हैं बबूल
उनको तो बन के खास रहना था



सब थे नंगे हमाम में फ़िर भी
तुमको तो बालिबास रहना था

देख कर तेरे हुस्न का जल्वा
किसको होशो-हवास रहना था

फ़ाइलातुन,मफ़ाइलुन,फ़ेलुन



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Monday, June 6, 2011

खुद से आखिर कितना बोलूं मैं-- gazal shyaam skha shyam

खुद से आखिर कितना बोलूं मैं
क्या बस अपना चेह्‌रा  देखूं मैं

अपने भी दिखते हैं बेगाने
दोस्त किसे अपना समझूं मैं

आईनो की तन्हा मह्फ़िल में
खुद में खुद को कब तक ढूंढूं मैं

देख तुझे यह हाल हुआ है
जब भी सोचूं तुझको सोचूं मैं

‘श्याम’सखा गर हो जाये मेरा
निशिदिन रास-रचाऊं, नाचूँ मैं





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Wednesday, June 1, 2011

कुछ न करने से तो जाये है हुनर-- gazal shyam skha shyam


23
आज कुछ नर्म-सी बातें कर लें
बैठ तो मर्म की बातें कर लें

हो चले ठण्डे सभी रिश्ते तो
आओ कुछ गर्म-सी बातें कर लें

ज्ञान की खुल ही न जाये कलई
आओ कुछ धर्म की बातें कर लें

कुछ न करने से तो जाये है हुनर
मुफ़्त ही कर्म की बातें कर लें

है न कोई कि जो फ़ेंके पत्थर
चुपके-से शर्म की बातें कर लें



फ़ाइलातुन फ़इलातुन,फ़ेलुन ४.४.९२ गोहाना ५ पी एम


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Sunday, May 29, 2011

जिस्म तो तूने नवाजा, खूबसूरत है उसे- gazal shyam skha shyam


कोई मेरे जख्म सी दे, चैन आये तब कहीं
कोई मेरे गम खरीदे, चैन आये तब कहीं


जिस्म तो तूने नवाजा, खूबसूरत है उसे 
गर कहीं से रूह भी दे, चैन आये तब कहीं


सूखकर सहरा हुए हैं, नैन मेरे देख तो 
इनको सुख की भी नमी दे, चैन आये तब कहीं


छू रहे हैं दुश्मनों वेफ हौसले आकाश को 
उनको भी तू इक गमी दे चैन आये तब कहीं


है लबालब झोली मौसम की गमों से भर रही
खारों को भी तू हँसी दे, चैन आये तब कहीं


हैं लगी लाशें भी अपना चैन खोने आजकल
मौत को भी जिं  दगी दे चैन आये तब कहीं


अश्क तो तूने बहुत मुझको दिये हैं ऐ खुदा 
पर लबों को तू हँसी दे चैन आये तब कहीं


है जहाँ मातम उन्हें तू हौसला कर अता
जो है माँगा वो सभी दे चैन आये तब कहीं 
फ़ाइलातुन,फ़ाइलातुन,फ़ाइलातुन,फ़ेलुन[ फ़ाइलुन]



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Saturday, May 14, 2011

मतलबी हैं लोग इन शहरों के-- gazal


21
जग-दिखावे की अदा मत करना
भूल जाना पर दगा  मत करना 


जख्म जो तुमने दिया,अब उस पर
अपने दामन से हवा मत करना


है नहीं ये जख्म भरने वाला
खामखा इसकी दवा मत करना


नेकियां तो हो गई गुम यारो
अब किसी का तुम भला मत करना


चाहो गर तुमको सताये न कोई
फिर किसी का तुम बुरा मत करना


अब कहां सुनता है वो फरियादें
तुम इबादत या दुआ मत करना


लोग पूछेंगे उदासी का सबब
हाशिये को तुम सफा मत करना


मतलबी हैं लोग इन शहरों के
इनसे तुम रस्मो-वफा मत करना


धन तो है ही चीज आनी जानी
धन पे झूठी तुम अना मत करना


दिल-फरेबों की है बस्ती ऐ ‘श्याम’
दिल किसी को भी अता मत करना


फ़ाइलातुन।फ़ाइलातुन।फ़ेलुन



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Tuesday, May 3, 2011

है घाटे का सौदा मुहब्बत सदा---gazal shyam skha shyam


20


मुहब्बत की वापिस निशानी करें।
शुरू फिर जो चाहें कहानी करें।।


है घाटे का सौदा मुहब्बत सदा।
हिसाब अब लिखें या जुबानी करें।।


चलो नागफनियाँ उखाड़ें सभी।
वहाँ फिर खड़ी रात-रानी करें।।


है रुत पर भला बस किसी का चला।
चलो बातें ही हम सुहानी करें।।


खरीदे बुढापे को कोई नहीं।
सभी तो पसन्द अब जवानी करें।।


बहुत जी लिये और मर भी लिये।
बता क्या तेरा जिन्दगानी करें।।


रवायत नहीं ‘श्याम’ जब ये भली।
तो फिर बातें क्यों हम पुरानी करें।

फ़ऊलुन।फ़ऊलुन।फ़ऊलुन।फ़ऊलुन


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Tuesday, April 12, 2011

हमारे आपके उस रूठने के दरमियां--gazal

19
हाँ हमारे आपके उस रूठने के दरमियां
चुपके-चुपके बोलती थीं बस हमारी चिटि~ठयां

जिन्दगी में जब कभी भी थीं बढ़ी यूँ तल्खियां
शहद कुछ-कुछ घोलती रहती थीं तब ये चिटिठयां

वक्त की मुटठी में बनकर जब महाजन आयीं ये
तोलती थीं ये कभी ज्यादा, कभी कम चिटिठयां

चाहता है दिल कभी जब उसको सहलाये कोई
खोलती हैं जख्म तब बस खामखा ये चिटिठयां

जब भी तनहाई का आलम यारो गहराता गया
आस-पास अपने लगीं तब डोलने ये चिटि~ठयां

आप हमको भूलने लगते हंै जब भी ‘श्याम’ जी
यादों के सन्दूक तब-तब खोलतीं ये चिटिठयां

फ़ाइलातुन,फ़ाइलातुन,फ़ाइलातुन,फ़ाइलुन
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Thursday, April 7, 2011

हैं उठ रहीं मेरे मन में खराब-सी बातें--- gazal

 18

हैं उठ रहीं मेरे मन में खराब-सी बातें
 थीं करनी   तुमसे मुझे बेहिसाब-सी बातें



हो तुम  भी, हम भी हैं जब साफगो, उठीं फिर क्यों
हमारे बीच बताओ नकाब-सी बातें

बगैर जाम के मदहोश कर दिया उसने
रहा वो करता ही हर पल शराब-सी बातें

इलाही तुम ही हो क्या रूबरू मेरे सचमुच
हकीकतो में भी होती हैं ख्वाब-सी बातें

खुदा का जिक्र ही होता है कब जहाँ में अब
यहाँ तो होती हैं बस अब अजाब-सी बातें

समझना ‘श्याम’ को आसां नहीं कभी यारो
करे है वो तो सदा बस किताब-सी बातें


मफ़ाइलुन. फ़इलातुन मफ़ाइलुन फ़ेलुन



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