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चले ख्यालों के जब लश्कर
हुये बेहाल हम अक्सर
गया है टूट दिल अपना
तेरे सपनो में यूं आकर
कहां मिलते हमें गुन्चे
लिखे किस्मत में थे पत्थर
रहा बस में न दिल अपने
तुझे सामने यूं पाकर
बहुत पछताये थे ऐ‘श्याम’
हमें वो अपने घर लाकर
मफ़ाएलुन मफ़ाएलुन
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