Swami Vivekanad was pupil of Sri Ramkrishna Parmhans , Parmhans was
pupil of Sri Totapuri. Sri Tota puri belonged to village Ladhana of Dist
Kaithal of Haryana .story goes like this that Totapuri went from
Haryana to Bengal to initiate RK to sanyas.and told him that he has come
specially for this purpose. RK said when Ma Kali comes in person to him
during sadhna why should I take Diksha from You. Totapuri told him that
you ask Ma because Ma has sent me. This whole episode appeared in a Ph D
thesis carried out by a 70 years Monk Sh vanmalidata under Guidance of
Mahrishi Dayand University Rohtakमेरा एक और ब्लॉग
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Friday, May 9, 2014
Tuesday, December 3, 2013
मानता हूं है बहुत काली मेरी लैला मगर- gazal by shyamskha shyam
मेरे गम का क्या सबब है
क्या तुम्हे मालूम है
दर्द सहना भी अदब है क्या तुम्हे मालूम है
मानता हूं है बहुत काली मेरी लैला मगर
सादगी उसकी गज़ब है क्या तुम्हे मालूम है
इश्क है गहरा समन्दर पार जाता है वही
डूबने का जिसको ढ़ब है क्या तुम्हे मालूम है
जानता हूं सुध कयामत के दिवस लोगे मेरी
पर जरूरत आज अब है क्या तुम्हें मालूम है।
सायबानो में रकीबों के तेरा हो जिक्र जब
जान जाती मेरी तब है क्या तुम्हे मालूम है
तुम जमाने से छुपा लोगे सखा अपने गुनाह
देखता रहता है वो सब है क्या तुम्हे मालूम है
मीरा राधा गोपियां उद्धव सुदामा गर बनो
श्याम मिलता यार तब है क्या मालूम है
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Wednesday, March 27, 2013
देखूं जो तुमको भांग पीके अबीर गुलाल लगें सब फ़ीके
देखूं जो तुमको भांग पीके
अबीर गुलाल लगें सब फ़ीके

मोतियाबिन्दी नयनो में काजल
्नित करता मुझको है पागल

अदन्त मुंह और हंसी तुम्हारी
इसमे दिखता ब्रह्माण्ड है प्यारीतेरा मेरी प्यार है जारी
जलती हमसे दुनिया सारीक्या समझें ये दुध-मुहें बच्चे
कैसे होते प्रेमी सच्चे

दिखे न आंख को कान सुने ना
हाथ उठे ना पांव चले ना

पर मन तुझ तक दौड़ा जाए
ईलू-इलू का राग सुनाए
हंसते क्यों हैं पोता-पोती
क्या बुढापे में न मुहब्ब्त होती

सुनलो तुम भी मेरे प्यारे
कहते थे इक चच्चा हमारे
कौन कहता है बुढापे में मुहब्ब्त का सिलसिला नहीं होता
आम भी तब तक मीठा नहीं होता जब तक पिलपिला नहीं होता

होली में तो गजल-हज्ल सब चलती है
जलने दो गर दुनिया जलती है
यही तो होली की मस्ती है
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Monday, February 25, 2013
यही तेरी कहानी है यही मेरी कहानी है-gazal by Dr shyamskha shyam
my 1st day at Houstan texas-will be here till 18th march
कभी पत्थर कभी कांटे कभी ये रातरानी है
कभी पत्थर कभी कांटे कभी ये रातरानी है
यही तो जिन्दगानी है,यही तो जिन्दगानी है
जमीं जबसे बनी यारो तभी से है वजूद इसका
नये अन्दाज दिखलाती मुहब्बत की कहानी है
खुशी से रह रहे थे हम मिले तुझसे नहीं जब तक
तुझे मिलकर हुआ ये दिल गमों की राजधानी है
मुझे लूटा है अपनो ने तुझे भी खा गये अपने
यही तेरी कहानी है यही मेरी कहानी है
रही है दूर ये दिल्ली,रहेगी दूर ये दिल्ली
रखैली थी रखैली है ये दिल्ली राजधानी है
रहे डरते `सखा' ताउम्र कुछ करने से पहले हम
हुये है मस्त कितने जब से छोड़ी सावधानी है
mfaelun,mfaelun,mfaelun,mfaelun
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Monday, February 4, 2013
घर से बाहर हूं घर मेरे भीतर है- gazal Dr shyam skha shyam
घर से बाहर हूं घर मेरे भीतर है
बात यही मुझको देती दुख अक्सर है
औढ़ आकाश सदा सोये हम बंजारे
रात हुए धरती बन जाती बिस्तर है
बादल बिजुरी जब भी हैं करते मस्ती
घबराता रहता बेचारा छप्पर है
रात मजे में सोती रहती है शब भर
दिन बेचारा खटता रहता दिन भर है
नेह उडेला है सदियों से नदियों ने
फिर भी क्यों खारा का खारा सागर है
खुशियां तो कब की भाग गईं पीठ दिखा
गम बैठा दिल में बनकर दिलबर है
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बात यही मुझको देती दुख अक्सर है
औढ़ आकाश सदा सोये हम बंजारे
रात हुए धरती बन जाती बिस्तर है
बादल बिजुरी जब भी हैं करते मस्ती
घबराता रहता बेचारा छप्पर है
रात मजे में सोती रहती है शब भर
दिन बेचारा खटता रहता दिन भर है
नेह उडेला है सदियों से नदियों ने
फिर भी क्यों खारा का खारा सागर है
खुशियां तो कब की भाग गईं पीठ दिखा
गम बैठा दिल में बनकर दिलबर है
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Monday, January 21, 2013
Cheated Again
A middle aged divorced man is searching for a partner. He comes across young man who is helping his widowed mother to find a life partner and arranges a meet between them. Lady is apprehensive lest she may be cheated.When they go ahead,It so happens with turn of events that instead of lady the man himself feels cheated....
"This is my entry for the HarperCollins–IndiBlogger Get Published contest
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आंखे तो गीलीं थीं / सूखे मन मौसम थे -gazal by Dr shyam skha shyam
दुनिया भर के गम थे
और अकेले हम थे
आंखे तो गीलीं थीं
सूखे मन मौसम थे
गोली थी छाती पर
हाथों में परचम थे
दोस्त हुये जब दुश्मन
गम ही बस हमदम थे
खुशियों की दुपहर में
बरसे गम छम छम थे
हव्वा हाथों हारे
यार मियां आदम थे
नींद उड़ी रातो कीं
ख्वाब हुए बेदम थे
छोड़ चले जब अपने
साथ खड़े बस गम थे
‘श्याम’ सुलझते कैसे
किस्मत के वे खम थे
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Sunday, January 20, 2013
Cheated Again
A middle aged divorced man is searching for a partner. He comes across young man who is helping his widowed mother to find a life partner and arranges a meet between them. Lady is apprehensive lest she may be cheated.It so happens that instead of lady the man himself feels cheated.................. but the readers enjoy the story
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Tuesday, November 6, 2012
जुल्फ़ तेरी छेड़ती है
हुस्न की ये बानगी है
दिल पे अपने आ बनी है
बेहिसी है बेकली है
दिल पे अपने आ बनी है
बेहिसी है बेकली है
हाय कैसी जिन्दगी है
जुल्फ़ तेरी छेड़ती है
ये हवा तो मनचली है
ख्वाब भी लगते पराये
अजनबी सी जिन्दगी है
चाहता महबूब को हूं
क्या नहीं ये बन्दगी है
तेरे बिन लगता नहीं है
ये भी दिल की दिल्लगी है
खलबली दिल में मची है
क्या बला की सादगी है
खलबली दिल में मची है
क्या बला की सादगी है
हो के गुमसुम बैठना भी
‘श्याम’ की यायावरी है
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