Monday, August 31, 2009

चुप भी तो रह पाना मुश्किल-gazal

अपनों को समझाना मुश्किल
चुप भी तो रह पाना मुश्किल

खोना मुश्किल पाना मुश्किल
खाली मन बहलाना मुश्किल

मौन रहें, तो बात बने कब
कहकर भी सुख पाना मुश्किल

बैरी सावन बरसे रिमझिम
रातों का कट पाना मुश्किल

सुलझों को उलझाना आसां
उलझों को सुलझाना मुश्किल

3-dbkgm se

19 comments:

  1. कई मुश्किलों को आसान करने का प्रयास .....
    अद्भुत अभिव्यक्ति
    कमाल की ग़ज़ल !

    बधाई ..श्याम सखाजी !

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  2. बहुत अच्छे ,कह कर भी बतलाना मुश्किल पिछली पोस्ट में गीत और ग़ज़ल का फर्क भी बारीकी से समझाया है | एक शेर पर बड़ी देर तक हँसी आती रही
    मेरे मरने पे कब्रिस्तान बोला
    बहुत इतरा रहा था आ गया न

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  3. namashkaar shyaam जी ............. लाजवाब लिखा है ......... manmohak शब्द हैं दिल से nikle sher .......

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  4. उलझो को उलझाना ---
    बहुत सुन्दर

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  5. सुलझों को उलझाना आसां
    उलझों को सुलझाना मुश्किल

    वाह वा...श्याम जी वाह...क्या बात कह गए हैं आप...बेमिसाल ...लाजवाब....गज़ब.
    नीरज

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  6. SOCH RAHA THA PAANCH MEN SE EK SHER CHUNKAR VISHESH COMMENT KARUN LEKIN YE TO SABHI EK SE BADHKAR EK HAIN KISE CHUNUN KISE CHHODUN. SARVOTTAM SHYAMJI, BADHAI.

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  7. निराला अंदाज़-ए-बयाँ !! बेहतरीन ग़ज़ल कही है आप ने भाई.

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  8. maktaa khaas pasand aaya

    venus kesari

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  9. 3-dbkgm se?
    matlab???

    gazal bahut hi badhia hai.....

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  10. बहुत ख़ूबसूरत भाव और अभिव्यक्ति के साथ लिखी हुई आपकी ये ग़ज़ल काबिले तारीफ है! बहुत खूब!

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  11. अपनों को समझाना मुश्किल,
    चुप भी तो रह पाना मुश्किल
    से लेकर
    सुलाझों को उलझाना आसां
    उलझों को सुलझाना मुश्किल

    तक का ग़ज़ल का ये सफ़र कई मुश्किलों से रु-ब-रु बहुत ही सहजता से करा गया, जो आसन है पर प्रिय नहीं, वह भी तो बता गया

    बधाई , बधाई, बधाई.............

    चन्द्र मोहन गुप्त
    जयपुर
    www.cmgupta.blogspot.com

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  12. अपनों को समझाना मुश्किल.
    चुप भी तो रह पाना मुश्किल.
    ये शेर बहुत गहरायी तक जाता है. मुझे लगता है कि शायद इसी शेर के लिये ये ग़ज़ल हुई है. आपने मन की बात कह दी.
    ऊपर वाला फुटकर शेर भी बहुत अच्छा है.

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  13. अपनों को समझाना मुश्किल.
    चुप भी तो रह पाना मुश्किल.
    ये शेर बहुत गहरायी तक जाता है. मुझे लगता है कि शायद इसी शेर के लिये ये ग़ज़ल हुई है. आपने मन की बात कह दी.
    ऊपर वाला फुटकर शेर भी बहुत अच्छा है.

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  14. सभी पंक्तियाँ दिल को छूती है.

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  15. जिंदगी की बेहद तल्ख हकीकत से रूबरू कराया आपने. इस सफल गजल के लिए बधाई.

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