Saturday, November 28, 2009

दिल की बस इतनी खता है

दिल की बस इतनी खता है
वो तुझे ही चाहता है

जिन्दगी है, या सजा है
वक्त कितना बेवफ़ा है

दिल की बस इतनी खता है
वो तुझे ही चाहता है

प्यार जब ग़म की दवा है
रूह फिर क्यों ग़मजदा है

सिर्फ़ सच ही तो कहा था
हो गया वो क्यों खफ़ा है

जुल्म सहना, मुस्कराना
आपकी बेढ़ब अदा है

याद तेरी आ रही है
यानी करना रतजगा है


एक बच्चा रो रहा है
क्या कहीं फिर बम फटा है

दर्दे-दिल की`श्याम’जी अब
क्या कहीं कोई दवा है


फ़ाइलातुन.फ़ाइलातुन25/112





मेरा एक और ब्लॉग
http://katha-kavita.blogspot.com/

22 comments:

  1. जिन्दगी है, या सजा है
    वक्त कितना बेवफ़ा है

    -बेहतरीन!!

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  2. एक बच्चा रो रहा है
    क्या कहीं फिर बम फटा है

    उम्दा गजल!!

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  3. "जिन्दगी है, या सजा है
    वक्त कितना बेवफ़ा है"

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  4. याद तेरी आ रही है
    यानी करना रतजगा है

    wah shyaam ji , yaad teri aane ka matlab hi ratjaga hai. bahut khoob.

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  5. दिले नादान तुझे क्या हुआ है
    आखिर इस दर्द की क्या दव है... चाचा गालिब से क्षमा के साथ:)

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  6. CHOTI BAHAR MEIN BHI KAMAAL BHARA HUVA HAI SHYAAM JI ... LAJAWAAB ...

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  7. जुल्म सहना, मुस्कराना
    आपकी बेढ़ब अदा है
    बहुत सुंदर जी,
    धन्यवाद

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  8. एक बच्चा रो रहा है
    क्या कहीं फिर बम फटा है
    बहुत मार्मिक पंक्तियाँ...
    पूरी ग़ज़ल बहुत खूबसूरत..!!

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  9. प्यार जब ग़म की दवा है
    रूह फिर क्यों ग़मजदा है


    -जबरदस्त रचना!!

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  10. जुल्म सहना, मुस्कराना
    आपकी बेढ़ब अदा है
    याद तेरी आ रही है
    यानी करना रतजगा है..
    बहुत सुंदर रचना लिखा है आपने! हर एक पंक्तियाँ लाजवाब है!

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  11. bahut sundar..choti bahar ki sashakt rachna,...

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  12. जुल्म सहना, मुस्कराना
    आपकी बेढ़ब अदा है
    बहुत ही प्यारा शेर है. गजल भी शानदार है. आप अब '' उस्ताद" की श्रेणी में दाखिल हो गये हैं. मैं अभी कुछ देर पहले वापस आया और सबसे पहले बल्कि शायद आज के दिन सिर्फ आप से ही सम्पर्क कर रहा हूँ. इस गजल के लिए मुबारकबाद. आप अवसाद से बाहर आ गये, यह खुशी की बात है. और हाँ, और ये होंट किसके हैं जिनपर इतनी गजब गजल हुई है.

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  13. दिल की बस इतनी खता है
    वो तुझे ही चाहता है

    bahut khoobsurat panktiyaan....


    --
    शुभेच्छु

    प्रबल प्रताप सिंह

    कानपुर - 208005
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  14. हैं ना दर्दे दिल की दावा ...ब्लोगिंग ...और क्या ...!!

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  15. उम्दा गज़ल।

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  16. kam shabdon me itani badhiya gazal sanjona koi aap se sikhe...atisundar..badhayi shyam ji

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  17. याद तेरी आ रही है

    यानी करना रतजगा है
    bahut khoobsoorat aur gahare arth vaale sher

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  18. सर्वत एम साहब ने सटीक बात कही कि आप उस्‍तादों के श्रेणी में हैं, हैं भी। आपके किसी शेर की कम तारीफ की जायें तो एक ही कारण हो सकता है कि पढ़ने वाला आपके भाव तक नहीं पहुँच पाया।

    तिलक राज कपूर

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  19. एक बच्चा रो रहा है
    क्या कहीं फिर बम फटा है
    Bahut hi umda sher
    daad ke saath

    Devi nangrani

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  20. सुन्दर रचना है।बधाई।

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