Saturday, May 14, 2011

मतलबी हैं लोग इन शहरों के-- gazal


21
जग-दिखावे की अदा मत करना
भूल जाना पर दगा  मत करना 


जख्म जो तुमने दिया,अब उस पर
अपने दामन से हवा मत करना


है नहीं ये जख्म भरने वाला
खामखा इसकी दवा मत करना


नेकियां तो हो गई गुम यारो
अब किसी का तुम भला मत करना


चाहो गर तुमको सताये न कोई
फिर किसी का तुम बुरा मत करना


अब कहां सुनता है वो फरियादें
तुम इबादत या दुआ मत करना


लोग पूछेंगे उदासी का सबब
हाशिये को तुम सफा मत करना


मतलबी हैं लोग इन शहरों के
इनसे तुम रस्मो-वफा मत करना


धन तो है ही चीज आनी जानी
धन पे झूठी तुम अना मत करना


दिल-फरेबों की है बस्ती ऐ ‘श्याम’
दिल किसी को भी अता मत करना


फ़ाइलातुन।फ़ाइलातुन।फ़ेलुन



मेरा एक और ब्लॉग http://katha-kavita.blogspot.com/

8 comments:

  1. जग-दिखावे की अदा मत करना
    भूल जाना पर दगा मत करना


    -बहुत खूब कहा!! वाह!!

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  2. बहुत अच्छी लगी आपकी ये गज़ल !

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  3. चाहो गर तुमको सताये न कोई
    फिर किसी का तुम बुरा मत करना
    खूबसूरत खयाल ..

    बेहतरीन गज़ल

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  4. गांव के लोग भी होशियार हो गये हैं
    पर उनका ज़िक्र यहां मत करना:)

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  5. चाहो गर तुमको सताये न कोई
    फिर किसी का तुम बुरा मत करना
    अब कहां सुनता है वो फरियादें
    तुम इबादत या दुआ मत करना..
    बहुत सुन्दर पंक्तियाँ! शानदार और लाजवाब ग़ज़ल लिखा है आपने!

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  6. kya khau ? bas lajwaab...dhansuuuuu....... jai hind jai bharat

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  7. बहुत सुन्दर .... अभिव्यक्ति तो कमाल की है....अच्छे काफिये में ग़ज़ल बंधी है.....

    इतनी प्यारी ग़ज़ल हम सब तक पहुँचाने का शुक्रिया.

    जग-दिखावे की अदा मत करना
    भूल जाना पर दगा मत करना


    जख्म जो तुमने दिया,अब उस पर
    अपने दामन से हवा मत करना

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  8. RAGHUNATH MISHRA6/10/11, 7:37 PM

    aap ki sabhi gajalen pyari hain,baar prhne ka man karta hai.
    RRaghunath Misra,Kota

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