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हैं दीवारों के भी कान आहिस्ता बोलो
लेंगे सब झट-से पहचान आहिस्ता बोलो
कौन लिखाकर लाया पट्टा चिर-जीवन का
हैं सब पल-दो-पल के मेहमान आहिस्ता बोलो
फाकामस्ती का जीवन है अपना यारो
आफत में हाकिम की जान आहिस्ता बोलो
निकल न जाये बात गलत मुँह से ऐ साहिब
घर में आये हैं मेहमान आहिस्ता बोलो
करो न बातें दैरो-हरम में ऐसी-वैसी
सुन लेगा मौला, भगवान आहिस्ता बोलो
दोस्त सजा हो जायेगी गर सच बोला तो
यह तो है शाही फरमान आहिस्ता बोलो
खत्म हुई कमबख्त ‘श्याम’ की गजलें आखिर
यारो छूटी सबकी जान अहिस्ता बोलो
मेरा एक और ब्लॉग http://katha-kavita.blogspot.com/
'श्याम' की गजल कहाँ खत्म हुई है,श्याम जी
ReplyDeleteइसने तो जान में भी जान डाल दी है.
सुन्दर गजल के लिए आभार.
मेरे ब्लॉग पर आईयेगा.
भूलिएगा नहीं.प्लीज.
कौन लिखाकर लाया पट्टा चिर-जीवन का
ReplyDeleteहैं सब पल-दो-पल के मेहमान आहिस्ता बोलो
बहुत खूब श्याम सखा जी
आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
ReplyDeleteप्रस्तुति आज के तेताला का आकर्षण बनी है
तेताला पर अपनी पोस्ट देखियेगा और अपने विचारों से
अवगत कराइयेगा ।
http://tetalaa.blogspot.com/
दोस्त सजा हो जायेगी गर सच बोला तो
ReplyDeleteयह तो है शाही फरमान आहिस्ता बोलो
बहुत खुबसूरत.... उम्दा ग़ज़ल..
सादर बधाई...
वाह ...बहुत खूब ।
ReplyDeleteबहुत सुन्दर ग़ज़ल ।
ReplyDeleteबेहतरीन
ReplyDeleteनिकल न जाये बात गलत मुँह से ऐ साहिब
ReplyDeleteघर में आये हैं मेहमान आहिस्ता बोलो... behatareen...
bahut khoob Ghazal...
करो न बातें दैरो-हरम में ऐसी-वैसी
ReplyDeleteसुन लेगा मौला, भगवान आहिस्ता बोलो
...लाज़वाब गज़ल..हरेक शेर बहुत उम्दा.
कौन लिखाकर लाया पट्टा चिर-जीवन का
ReplyDeleteहैं सब पल-दो-पल के मेहमान आहिस्ता बोलो
हर शेर लाजवाब.
बहुत उम्दा...लाज़वाब गज़ल
ReplyDeletehttp://sanjaybhaskar.blogspot.com/
श्याम जी
ReplyDeleteबढ़िया ग़ज़ल.......
फाकामस्ती का जीवन है अपना यारो
आफत में हाकिम की जान आहिस्ता बोलो
क्या सूफियाना लहजा है..... बेबाक लहजे ने ग़ज़ल की खूबसूरती में चार चाँद लगा दिए....!!!!
आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है कृपया पधारें
ReplyDeleteचर्चामंच-638, चर्चाकार-दिलबाग विर्क
मित्रो एक बार फिर आपके स्नेह से आपल्लवित होकर ह्रदय से आभारी हूँ श्याम सखा श्याम
ReplyDeleteनिकल न जाये बात गलत मुँह से ऐ साहिब
ReplyDeleteघर में आये हैं मेहमान आहिस्ता बोलो
क्या बात है!!
निकल न जाये बात गलत मुँह से ऐ साहिब
ReplyDeleteघर में आये हैं मेहमान आहिस्ता बोलो
kya baat hai sahi kaha hai is sher me aapne puri gazal hi kamal hai
saader
rachana
बहुत ही लाजवाब गज़ल.
ReplyDeletebahuty achi ghazal likhi hai aapne
ReplyDeleteसुन्दर गजल के लिए आभार.
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