Monday, June 11, 2012

सभी ख्वाब तो हैं बने टूटने को--- Gazal -Dr shyam skha shyam


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अभी तक सपन जो भी उर में थे लम्बित
हुए देख तुमको वे नयनों में अंकित

लजाने लगीं तितलियां बाग में तब
भंवर ने गुलों को किया जब भी चुम्बित

अचानक भरी प्यार से झोली उसकी
रहा था मुहब्बत से अब तक जो वंचित

सभी ख्वाब तो हैं बने टूटने को
किये जाते नाहक हो क्यों उनको संचित

जमाना कभीश्यामअनूठे को देखे
रहेगा खड़ा देखता वो अचम्भित

फ़ऊलुन,फ़ऊलुन.फ़ऊलुन,फ़ऊलुन,





मेरा एक और ब्लॉग http://katha-kavita.blogspot.com/

10 comments:

  1. बहुत खूबसूरत ग़ज़ल ये लगी है
    नये काफि़या से हुआ मन तरंगित।
    तलाशा बहुत पर नहीं कुछ मिला है
    जिसे दोष कहकर करूँ आज इंगित।
    चलो आज हम भी उसी राह चल दें
    सभी ने युगों से किया जिसको वंदित।

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  2. आभार भाई साहिब आपकी जर्रा-नवाजी का, हरियाणा साहित्य अकादमी की पत्रिका हरिगंधा हेतु ४-६ गज़ल मेल कर दे, फोटो सहित,

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  3. बहुत सुन्दर गजल है बधाई।

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  4. अचानक भरी प्यार से झोली उसकी
    रहा था मुहब्बत से अब तक जो वंचित
    .....क्या बात है...श्याम जी

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  5. -- सुन्दर गज़ल... श्याम सखा जी...

    देखने में तो यूं लगती है दोषपूर्ण ये गज़ल |
    मुकफ़्फ़ा-ग़ज़ल है पर हुजूरे-आला ये गज़ल |

    जोर रहता है काफिया पर ही इनमें श्याम,
    रदीफ के बिना ही होती है यारा ये गज़ल |

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  6. अचानक भरी प्यार से झोली उसकी
    रहा था मुहब्बत से अब तक जो वंचित
    बहुत ही सुन्दर काफिये.. नए हैं, सुन्दर प्रयोग है...बधाई शाम सखा जी....

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  7. Surendra Kumar Arora6/12/12, 8:38 PM

    4th stenja is marvellous

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  8. आभार आप सभी का गज़ल कबूलने हेतु

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  9. लजाने लगीं तितलियां बाग में तब
    भंवर ने गुलों को किया जब भी चुम्बित

    क्या मासूमियत और इन्तिहाई खूबसूरत तरीके से मुहब्बत को रंग दिया है आपने... श्याम जी बधाई स्वीकारें.

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