Monday, July 20, 2009

गज़ल श्याम सखा


तू आर हो जा या पार हो जा  
पर इक तरफ मेरे यार हो जा


या तो सिमट कर रह मेरे दिल में

या फैल इतना, संसार हो जा

जो जुल्म बढ़ जाये हद से ज्यादा

तजकर अहिंसा हथियार हो जा


गुल था शरारत करने लगा जब

तितली ने कोसा जा खार हो जा

सूखा है मौसम, सूखी हूँ मै भी

अब प्यार की तू रसधार हो जा


गर थी तुझे धन की कामना तो

किसने कहा था फनकार हो जा


राधा भी तेरी, मीरा भी तेरी

तू ‘श्याम’ मेरा इस बार हो जा



मुस्तफ़इलुन फ़ा ,मु्स्तफ़इलुन फ़ा

19 comments:

  1. या तो सिमट कर रह मेरे दिल में
    या फैल इतना, संसार हो जा

    --बहुत सुन्दर!! वाह!

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  2. तू आर हो जा या पार हो जा,
    पर इक तरफ मेरे यार हो जाया,
    तो सिमट कर रह मेरे दिल में
    या फैल इतना, संसार हो जा
    राधा भी तेरी, मीरा भी तेरी
    तू ‘श्याम’ मेरा इस बार हो जा
    Superb...touching...Aar-Parr thru my heart...

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  3. जो जुल्म बढ़ जाये हद से ज्यादा
    तजकर अहिंसा हथियार हो जा ........
    वाह!

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  4. गुल था शरारत करने लगा जब
    तितली ने कोसा जा खार हो जा

    kya khubsurati se aapne is nokjhok ko she'r ki shakl me gazal me jagah di hai kaamaal ki baat hai ye .... ye gazal puri tarah se gey gahal hai main to gungunaa rahaa hun bahot khubsurat gazal kahi hai aapne .... bahot bahot badhaayee...


    arsh

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  5. सूखा है मौसम, सूखी हूँ मै भी
    अब प्यार की तू रसधार हो जा,

    mere liye tu bahar ho ja,

    laazwab kavita...waise aap likhate hi aise hai
    ..badhayi ho..

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  6. aap ko padh kar hamesha hi achcha lagta hai..

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  7. kya baat hai
    waah ....

    har pankti men bahut hi sundar bhaav hain

    badhaayi itni utkrasht rachana ke liye !!

    shubh kamnayen

    आज की आवाज

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  8. tera har ik lafz teer numaaya hai...
    dil ke aar paar hoja....dil ke aar paar ho ja..

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  9. ये तो आर-पार की लड़ाई लगती है डॊक्टर सा’ब:)

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  10. वाह बहुत ख़ूबसूरत और लाजवाब रचना लिखा है आपने! मुझे तो आपकी हर एक रचना बेहद पसंद है!

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  11. या तो सिमट कर रह मेरे दिल में
    या फैल इतना, संसार हो जा

    कही गहरे उतर गया आपका ये शेर.......... लाजवाब ग़ज़ल......... प्रणाम

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  12. वाह वाह ...
    बहुत सही बनी है ग़ज़ल
    आपकी ग़ज़ल ने कुछ ऐसा हमें जताया है ....
    तू धार हो जा कटार होजा
    जो पढ़े जिगर के पार होजा

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  13. श्याम जी हर शेर अद्धुत है
    बेहतरीन गजः
    बहर भी बहुत ख़ास है

    वीनस केसरी

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  14. एक अनूठी ग़ज़ल एक बेमिसाल रदीफ़ के साथ...अहा!
    मक्ते ने दिल ले लिया श्याम साब! जिस खूबसूरती से आप कई बार अपना तखल्लुस इस्तेमाल करते हैं, मन बस वाह कर उठता है शायर की चपलता पर!

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  15. गर थी तुझे धन की कामना तो
    किसने कहा था फनकार हो जा
    बहुत खूब श्याम जी वाह...बेहतरीन ग़ज़ल कही है आपने...बधाई..
    नीरज

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  16. या तो सिमट कर रह मेरे दिल में
    या फैल इतना, संसार हो जा
    क्या बात है.

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  17. तू आर हो जा या पार हो जा
    पर इक तरफ मेरे यार हो जा

    इस रंग बदलती दुनिया में
    इन्सान की नीयत ठीक नहीं....
    क्या जाने वो कब रंग बदल दे, नीयत बदल दे...आखिर पाला बदलने का लाभ व लोभ भी तो हैं:)

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  18. बहुत बढिया !! बधाई।

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