
अपनों को समझाना मुश्किल
चुप भी तो रह पाना मुश्किल
खोना मुश्किल पाना मुश्किल
खाली मन बहलाना मुश्किल
मौन रहें, तो बात बने कब
कहकर भी सुख पाना मुश्किल
बैरी सावन बरसे रिमझिम
रातों का कट पाना मुश्किल
सुलझों को उलझाना आसां
उलझों को सुलझाना मुश्किल
चुप भी तो रह पाना मुश्किल
खोना मुश्किल पाना मुश्किल
खाली मन बहलाना मुश्किल
मौन रहें, तो बात बने कब
कहकर भी सुख पाना मुश्किल
बैरी सावन बरसे रिमझिम
रातों का कट पाना मुश्किल
सुलझों को उलझाना आसां
उलझों को सुलझाना मुश्किल
dbgm-3
मेरा एक और ब्लॉग
http://katha-kavita.blogspot.com/
मौन रहें, तो बात बने कब
ReplyDeleteकहकर भी सुख पाना मुश्किल
-बहुत सही!
आज के समय में चुप्प रहना भी नही चाहिए!!!बहुत ही अच्छी रचना...
ReplyDeleteअपनों को समझाना मुश्किल
ReplyDeleteचुप भी तो रह पाना मुश्किल
-बहुत सही.......
अपनों को समझाना मुश्किल
ReplyDeleteचुप भी तो रह पाना मुश्किल
सुलझों को उलझाना आसां
उलझों को सुलझाना मुश्किल
- मुश्किल है. अच्छा लगा.
बैरी सावन बरसे रिमझिम
ReplyDeleteरातों का कट पाना मुश्किल
जबरदस्त, बहुत खूब
बैरी सावन बरसे रिमझिम
ReplyDeleteरातों का कट पाना मुश्किल ..
सच है ...... बहुत लाजवाब शेर है ..... वह ... वाह .....
मौन रहें, तो बात बने कब
ReplyDeleteकहकर भी सुख पाना मुश्किल
wah shyam ji , sabhi uttam.
सुलझों को उलझाना आसां
ReplyDeleteउलझों को सुलझाना मुश्किल
बहुत सही कहा है । सुन्दर।
bahut sundar
ReplyDeleteसुलझो को उलझाना मुश्किल
ReplyDeleteउलझो को सुलझाना मुश्किल
सच है
क्योंकि
उलझन में उलझे बिना उलझन कहाँ सुलझती है
बहुत सुन्दर गज़ल
अपनों को समझाना मुश्किल
ReplyDeleteचुप भी तो रह पाना मुश्किल
सुलझों को उलझाना आसां
उलझों को सुलझाना मुश्किल
वाह श्याम जी वाह...मतले से मकते तक बेहतरीन ग़ज़ल...दाद कबूल हो.
नीरज
हमें नहीं पता ये कि फउलुन माफउलुन फाउलुतुन जैसे किसी स्केल पर सही उतरती है या नहीं पर इस गजल की गेयता, बहाव और अर्थ सब मजेदार हैं, हमें ऐसा ही लिख पाने में मजा आता है।
ReplyDeleteसुलझों को उलझाना आसां
उलझों को सुलझाना मुश्िकल
ये शेर तो खास अर्थ वाला है
मुश्िकलों को बहुत आसानी से समझाने के लिये पुनश्च धन्यवाद।
ReplyDeleteबहुत बढिया!!
ReplyDeleteWaah....kya baat hai....
ReplyDeleteShabdon ki jadugari se sadharan baat ko asadharan bana diya aapne...
Sundar gazal...
sundar
ReplyDeleteमौन रहें, तो बात बने कब
ReplyDeleteकहकर भी सुख पाना मुश्किल
क्या बात है. सुन्दर सारगर्भित गज़ल.