Friday, June 22, 2012

कोई पागल ही बनाएगा यहाँ घर दोस्तो-gazal by Dr shyam skha shyam

 
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भीड़ का मेला अकेला आदमी हर दोस्तो
कोई पागल ही बनाएगा यहाँ घर दोस्तो

चिमनियों का हर तरफ फ़ैला धुआं है देखिये
कौन इशारे मौसमी समझे यहाँ पर दोस्तो

पंछियों को था बिजूकों से डराता आदमी
खुद से ही अब तो उसे लगने लगा डर दोस्तो

ईंट पर बुनियाद की हम शे अब कैसे कहें
जब फ़्लैट अपना है मंजिल सातवीं पर दोस्तो

श्यामसे जब भी हो मिलना आपको श्यामजी
कीजिये बातें हवा से खोलकर पर दोस्तो

फ़ाइलातुन,फ़ाइलातुन,फ़ाइलातुन,फ़ाइलुन





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Monday, June 11, 2012

सभी ख्वाब तो हैं बने टूटने को--- Gazal -Dr shyam skha shyam


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अभी तक सपन जो भी उर में थे लम्बित
हुए देख तुमको वे नयनों में अंकित

लजाने लगीं तितलियां बाग में तब
भंवर ने गुलों को किया जब भी चुम्बित

अचानक भरी प्यार से झोली उसकी
रहा था मुहब्बत से अब तक जो वंचित

सभी ख्वाब तो हैं बने टूटने को
किये जाते नाहक हो क्यों उनको संचित

जमाना कभीश्यामअनूठे को देखे
रहेगा खड़ा देखता वो अचम्भित

फ़ऊलुन,फ़ऊलुन.फ़ऊलुन,फ़ऊलुन,





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Monday, May 28, 2012

मिले प्यार में मुझको मौसम सभी थे-gazal shyam skha


 

मुहब्बत मुझे हर जगह हां मिली थी
      यहां भी मिली है वहां भी मिली थी

सुनना ही आया  कहना ही आया
मुझे दिल मिला था जुबां भी मिली थी

मिले प्यार में मुझको मौसम सभी थे
फ़िजां भी मिली थी खिजां भी मिली थी

रहे-इश्क जब था पकड़कर  चला मैं
      हुई मुश्किलें मुझको आसां मिली थी
 
     गिला जिन्दगी से करूं `श्याम' मैं क्या
     मुझे मौत बन मेहरबां भी मिली थी















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Wednesday, April 18, 2012

जीस्त जब भी सवाल करती है---gazal dr shyam skha shyam



जीस्त जब भी सवाल करती है 

मेरा जीना  मुहाल करती  है

मौत भी तो कमाल करती है 

साँसों कि देखभाल करती है

रूठकर मुझसे मेरी जानेमन
मेरी ज्यादा सँभाल करती है  


चाँद की बेवफाई पर उजाला 
जुगनुओं की मशाल करती है

जागती रातभर है बैरन रात 
नींद बैठी मलाल करती है 

याद आती 'श्याम' जब तेरी 
मेरी धड़कन धमाल करती है



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Saturday, April 7, 2012

हमने माना‘श्याम’फक्कड़’और है कुछ बदजुबाँ-gazal shyam skha shyam


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जिन्दगी को जब कभी सिक्कों से है आँका गया
यूँ लगा दोष  आपका था और मुझे डाँटा गया

जब किसी कारण से भी घर था कभी बाँटा गया
दुख  हमेशा  क्यों मेरे  ही वास्ते  छांटा गया

शख्स जब  कोई  गिरा अपने उसूलों से कभी
समझो  चाँदी  की छड़ी  से है   हाँका  गया

मुझमें  और सुकरात में बस फ़र्क इतना ही रहा
पी गया वो जह् पर मुझसे विष फाँका गया

था गुजरता जब कभी उस शोख के कूचे से मैं
शोर मच जाता थादेखो वह गया, बाँका गया

हमने मानाश्यामफक्कड़और है कुछ बदजुबाँ
पर खरा उतरा है जब परखा गया,जाँचा गया

फाइलातुन,फाइलातुन,फाइलातुन,फ़ाइलुन


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Thursday, March 29, 2012

कोई काम आया कब मुसीबत में

 
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ज़ख्म था ज़ख्म का निशान भी था
दर्द  का अपना इक मकान  भी   था

दोस्त  था और    मेहरबान  भी  था
ले रहा      मेरा  इम्तिहान   भी  था

शेयरों    में   गज़ब  उफान   भी था
कर्ज़  में    डूबता      किसान भी था

आस     थी जीने की अभी    बाकी
रास्ते  में मगर    मसान भी था

कोई काम आया  कब  मुसीबत में
कहने को अपना खानदान भी था

मर के दोज़ख मिला तो समझे हम
वाकई   दूसरा      जहान     भी था

उम्र भर साथ  था  निभाना जिन्हें
फासिला उनके   दरमियान भी था

खुदकुशीश्यामकर ली क्यों तूने
तेरी किस्मत में   आसमान भी था
फ़ाइलातुन,मफ़ाइलुन ,फ़ेलुन

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