Tuesday, June 23, 2009

गज़ल -श्याम






दूसरों के सर बचाने हैं तुझे गर
फिर तो तू अपनी ही जानिब मोड़ पत्थर

कौन पूछे है, लियाकत को यहाँ पर
पेट भरना है तुझे तो तोड़ पत्थर

देखकर हालत बुतों की, हैं लगाते
टूटने की आइने से होड़ पत्थर

चिड़िया मारीं जब अहेरी हाथ में था
तू हुआ इतिहास में चितौड़ पत्थर

है खड़ा चौराहे पर बेटा खुदा का
कायरों में तू भी है, चल छोड़ पत्थर

बीच इन्सानों के कैसे फँस गया है तू
दौड़ सकता है ,अगर तो,दौड़ पत्थर

श्याम जीसचमुच बुरा वक्त आने को है
छत
पे अपनी आप भी लें जोड़ पत्थर


फ़ाइलातुन,फ़ाइलातुन,फ़ाइलातुन

15 comments:

  1. kaayron men tu bhi hai, chal chhod patthar......
    waah waah waah
    kya baat kah di
    badhaai !

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  2. कौन पूछे है, लियाकत को यहाँ पर
    पेट भरना है तुझे तो तोड़ पत्थर

    बहुत ही बेहतरीन रचना बधाई

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  3. shabda sanyojan bahut hi badhiya hai ........bhaw to masaalaah achahhi rachanaao ke liye bahut dhnyaawaada

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  4. कौन पूछे है, लियाकत को यहाँ पर
    पेट भरना है तुझे तो तोड़ पत्थर
    bahut hi sundar!

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  5. कौन पूछे है, लियाकत को यहाँ पर
    पेट भरना है तुझे तो तोड़ पत्थर
    ज़िन्दगी की तल्ख़ सच्चाई से रूबरू करवाती ग़ज़ल....बेहतरीन...वाह...
    नीरज

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  6. ’श्याम जी’ सचमुच बुरा वक्त आने को है
    छत पे अपनी आप भी लें जोड़ पत्थर

    आपने उस वक़्त की याद करा दी जो हम अपने बुजुर्गों से सुनते थे की पाकिस्तान में वो बुरे वक़्त से निपटने की लिए छत पर ईंट जमा करके रखते थे ............. वैसे तो पूरी की पूरी ग़ज़ल तारीफ़ के काबिल है ..... लाजवाब

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  7. बढ़िया रचना ,बधाई.

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  8. बेहतरीन रचना.......... बधाई!!!!

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  9. उम्‍दा रचना

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  10. shyamji, behatareen rachna ke liye badhai sweekaren.

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  11. बीच इन्सानों के कैसे फँस गया है तू
    दौड़ सकता है ,अगर तो,दौड़ पत्थर

    ग़ज़ल का लाजवाब शेर.

    बधाई.

    चन्द्र मोहन गुप्त

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  12. देखकर हालत बुतों की, हैं लगाते
    टूटने की आइने से होड़ पत्थर

    -बहुत उम्दा!

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  13. पूरी गजल सहेजने लायक
    फिर भी ये शेर बहुत पसंद आया

    देखकर हालत बुतों की, हैं लगाते
    टूटने की आइने से होड़ पत्थर
    बीच इन्सानों के कैसे फँस गया है तू
    दौड़ सकता है ,अगर तो,दौड़ पत्थर
    नमन नमन

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  14. पत्थर मोड़ना भी चाहूं तो किस कदर? इतने बडे बडे़ हैं ये पत्त्थर:-)

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  15. रचना बहुत अच्छी लगी....बहुत बहुत बधाई....

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