Tuesday, March 23, 2010

खुदकुशी ठान ली चिरागों ने-गज़ल



 दिल में लेकर जो  प्यास बैठीं हैं
क्यों समन्दर के पास बैठी हैं

 

पालकी के यूं पास बैठी हैं
सारी सखियां उदास बैठी है

खुदकुशी ठान ली चिरागों ने
ऑंधियां बदहवास बैठी हैं


मौत ने खत्म कर दिये शिकवे
सौतनें आस पास बैठी हैं

बेटे आफ़िस,बहुएं गईं दफ़्तर
घर सँभाले तो सास बैठी हैं

हो गई खत्म नस्ल रांझों की
हीर सारी उदास बैठी हैं

‘श्याम’ के आसपास बैठी हैं
गोपियां कर के रास बैठी हैं

मेरा एक और ब्लॉग
http://katha-kavita.blogspot.com/

16 comments:

  1. बहुत खूब!!

    वाह!

    -
    हिन्दी में विशिष्ट लेखन का आपका योगदान सराहनीय है. आपको साधुवाद!!

    लेखन के साथ साथ प्रतिभा प्रोत्साहन हेतु टिप्पणी करना आपका कर्तव्य है एवं भाषा के प्रचार प्रसार हेतु अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें. यह एक निवेदन मात्र है.

    अनेक शुभकामनाएँ.

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  2. खुदकुशी ठान ली चिरागों ने
    ऑंधियां बदहवास बैठी हैं
    बहुत सुन्दर
    बेहतरीन

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  3. खुदकुशी ठान ली चिरागों ने
    ऑंधियां बदहवास बैठी हैं

    bahut badhiya hai Sir.

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  4. Shyam ji Dil khush kar dittan

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  5. खुदकुशी ठान ली चिरागों ने
    ऑंधियां बदहवास बैठी है

    is sher ko padh kar dimag sunn ho gaya :(

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  6. हो गई खत्म नस्ल रांझों की
    हीर सारी उदास बैठी हैं
    वाह लूट लिया आपने.....इस बेहतरीन शेर पर हजारों दाद क़ुबूल करें.....

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  7. खुदकुशी ठान ली चिरागों ने
    ऑंधियां बदहवास बैठी हैं
    ग़ज़ल के हर शेर लाजवाब हैं।

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  8. अच्छी रचना,धन्यवाद.

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  9. उम्दा रचना।
    खुलने में देर लग रही है । आप भी टेम्पलेट बदल कर देखें , शायद फर्क पड़े।

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  10. अत्यंत सुन्दर! लाजवाब प्रस्तुती!

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  11. मौत ने खत्म कर दिये शिकवे
    सौतनें आस पास बैठी हैं
    बहुत खूब ..क्या बात कही है.
    लन्दन के स्कूलों में मनाया जाता है इंडिया डे. http://shikhakriti.blogspot.com/

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  12. खुदकुशी ठान ली चिरागों ने
    ऑंधियां बदहवास बैठी हैं
    sundar..

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  13. खुदकुशी ठान ली चिरागों ने
    ऑंधियां बदहवास बैठी हैं

    बेटे आफ़िस,बहुएं गईं दफ़्तर
    घर सँभाले तो सास बैठी हैं

    बेहतरीन ग़ज़ल कही है श्याम जी...सारे शेर कमाल के हैं...दाद कबूल करें
    नीरज

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  14. खुदकुशी ठान ली चिरागों ने
    ऑंधियां बदहवास बैठी हैं

    yeh sher uttam hai...! Waise puri ghazal achhi lagi!

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