Friday, June 5, 2009

फ़ुटकर शे‘र नं -२


चिरागों से सबक सीखें जलें कैसे
दिलों के भी तो बुझने का सबब जानें

वज्न- मफ़ाएलुन,मफ़ाएलुन,मफ़ाएलुन



फोटो- श्याम सखा

7 comments:

  1. बहुत खूब फरमाया है आपने। बधाई।

    -Zakir Ali ‘Rajnish’
    { Secretary-TSALIIM & SBAI }

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  2. बहेतरीन रचना।

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  3. अच्छा हो कि कविता यहीं दिखाई दे। पढ़ने में सुविधा होगी।

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  4. umda ghazal.............mubaraq ho

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  5. पढ़ते ही मन ने बरबस ये पंक्तियाँ रच दीं
    ये जल तो लेते हैं एक दूसरे से
    अँधेरा अपनी तली का न पहचानें

    परवाह करते हैं सिर्फ अपनी ही नमी की
    दूसरा चुक रहा है ये हैं अनजाने

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